Traditional Marketing vs Direct Selling: ट्रेडिशनल मार्किट ( परम्परागत व्यापर )- ट्रेडिशनल मार्किट ( परम्परागत व्यापर ) वो व्यापर है या सिद्धांत है जिसमे कंस्यूमर( ग्राहक) सीधे तोर पर कंपनी से प्रोडक्ट परचेस (खरीदारी ) नहीं करता बल्कि वो अपनी नजदीक की किसी दूकान (रिटेलर) से अपने जरुरी सामान की खरीदारी करता है ,और वो दुकानदार भी ग्राहकों की आवश्कयता अनुसार सामन किसी अन्य थोक दुकानदार ( व्होलसेलर) से खरीदता है , इसी प्रकार थोक दुकानदार ( व्होलसेलर) भी सामन खुद नहीं बनता और वो आगे किसी स्टोकेस्ट से लेता है और स्टोकेस्ट आगे एजेंट अथवा केयरिंग एंड फॉरवार्डिंग एजेंसी से लेता है और केयरिंग एंड फॉरवार्डिंग एजेंसी डायरेक्ट  मैन्युफैक्चरर से सामन लेती है , पर वो भी तब जब उसका प्रचार कंपनी द्वारा प्रचुर मात्रा में करा दिया हो ताकि उसे मार्किट में बेचने में कोई असुविधा न हो और कोई नया प्रोडक्ट लांच होने से पहले ही ग्राहकों में उस प्रोडक्ट के प्रति रूचि उत्पन्न हो सके , और ये प्रचार बड़े बड़े सेलिब्रिटी द्वारा कराया जाता है जैसी हम आज के युग में अपना रोले मॉडल समझते है ,और उनकी द्वारा भ्रामक और जोशीले प्रचारो से हम प्रभावित होते है और बिना किसी प्रोडक्ट्स की गुणवक्ता जाने हम आसानी से वो प्रोडक्ट्स ले लेते है , इस प्रचार पर खर्च का भार हम सब ग्राहकों से ही वसूला जाता है एमआरपी के रूप में

सोचने वाली बात ये है की यहाँ पर जो सबसे महत्वपूर्ण सक्स है वो है ग्राहक और मैन्युफैक्चरर, फिर इन सभी बिचोलियो से फ़ायदा है अथवा नुक्सान क्या हो सकता है ? और इसका तोड़ क्या है ?

बिचोलियो से ग्राहकों को सिर्फ एक फ़ायदा है की सभी सामन आपके नजदीक में आपको उपलब्ध हो जाता है , बिलकुल आपके घर के पास

पर बिचोलियो से होने वाले नुक्सान के अगर गड़ना करें तो आप दंग रह जायेंगे :-

. सबसे पहला नुक्सान है मिलावटी सामान – आज आप देख रहे होंगे की आये दिन सुनने को मिलता है फलां जगह  में छापा पड़ा और ढेरो नकली ,मिलावटी ब्रांडेड सामन पकड़ा गया , बिचोलिये चंद पैसो के लालच में हमारे स्वास्थ्य के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ करते हैं , जैसे नकली अथवा मिलावटी,  घी , तेल , नमक , आटा, दाल , चावल ,खाने के उत्पाद , लगाने के उत्पाद सब कुछ नकली मिल जाता है , क्योकि आपने सुना होगा कोई गाय , भेस , बकरी आदि दूध में मिलावट नहीं करते बल्कि उस दूध और दूध से बनी वस्तुओ का व्यापार करने वाले बिचोलिये उसमे मिलावट करते है जैसे नकली या मिलावटी घी , मिठाई आदि

२. दूसरा नुक्सान – असामान्य कीमते , आपको एक ही सामन की हर दूकान- दूकान अलग – अलग कीमते देखने को मिलेंगी, ज्यादातर एमआरपी (MRP) पर वस्तुओ को बेचा जाता है

३. पक्के बिल का अभाव – आपके नजदीक की ज्यादातर दुकानदार आपको पक्का बिल नहीं देते जिससे आपको नकली सामान मिलने पर भी आप दुकानदार पर कोई उचित कार्यवाही नहीं कर सकते और दूसरी तरफ पक्का बिल न होने से देश को आर्थिक नुक्सान भी उठाना पड़ता है क्योकि ये सीधे सीधे टैक्स चोरी है

४. ग्राहक का शोषण– ग्राहक सिर्फ ग्राहक बनकर रह जाता है , उसका शोषण किया जाता है और असली पैसो ( खून पसीने की कमाई ) से नकली सामन , अधिक मूल्य (कीमते) और सिर्फ खर्चा और खर्चा, ट्रेडिशनल व्यापार में सभी पैसा खर्च करते हैं जैसे कंपनी ( मैन्युफैक्चरर) , केयरिंग एंड फॉरवार्डिंग एजेंसी , स्टॉकिस्ट , व्होलसेलर( थोक विक्रेता), रिटेलर (खुदरा व्यापारी -दुकानदार ) और अंत में ग्राहक ( आप और हम ), पर ग्राहक (आप और हम ) को छोड़ कर सभी पैसा कमाते है

अब आप पूछेंगे पर इस समस्या का इलाज क्या है ? हम कैसे नकली सामान , अधिक मूल्य, असामान्य कीमते, और खर्चा से आमदनी कैसे कर सकते है ?

उत्तर है – डायरेक्ट सेल्लिंग

अब ये डायरेक्ट सेल्लिंग क्या है ?

एक डायरेक्ट सेल्लिंग ( सीधा व्यपार )  करने की  एक व्यवस्था है  , अर्थात वो कंपनी जो सीधे ग्राहकों को अपना प्रोडक्ट्स बेचती है ,

कहने का तात्पर्य यह है की डायरेक्ट सेल्लिंग कंपनी वो होती है जो ट्रेडिशनल मार्किट ( परम्परागत व्यापर ) की तरह अपने प्रोडक्ट्स को बेचने की बजाय डायरेक्ट कंजूमर ( ग्राहक) को अपना प्रोडक्ट्स बेचती है

इसमें कंपनी या मैनुफेक्चरर सीधे ग्राहकों से जुड़ता है इसके लिए कंपनी ग्राहकों को डायरेक्ट सेलर बनती है जिसकी अपनी एक प्रक्रिया है , जिसमे ग्राहकों का KYC ( नो  योर कस्टमर)  किया जाता है , जिसके बाद ग्राहक एक डायरेक्ट सेलर बन जाता है और उस ग्राहक को कंपनी द्वारा बनाये गए सभी उत्पाद खरीदने एवं बेचने का अधिकार मिल जाता है ,सीधे तोर पर कहें तो कंपनी उस ग्राहक हो अपना पार्टनर बना देती है और उसको ये अधिकार देती है की वो भी अन्य ग्राहकों को जोड़कर उनको डायरेक्ट सेलर बना सकता है और दूसरे तोर पर कहें तो ये अपनी फ्रैंचाइज़ी देने के सामान है पर यहाँ कोई फ्रैंचाइज़ी चार्ज नहीं होता

डायरेक्ट सेलर बन जाने के लाभ :-

  1. जैसा की नाम से ही ज्ञात होता है डायरेक्ट सेलर अर्थात सीधा बेचने वाला , कहने का तात्पर्य यह है की यहाँ , ग्राहक -ग्राहक नहीं रहता अपितु एक बिज़नेस ओनर बन जाता है , और उसको उसे पुरे भारत अथवा दुनिया में व्यापर करने का अवसर मिल जाता है
  2. अच्छी क़्वालीटी – डायरेक्ट सेलिंग के माध्यम से प्रोडक्ट कस्टमर या डायरेक्ट सेलर के पास सीधा पिकअप सेंटर के माध्यम से पहुँचता है , जिस से प्रोडक्ट की गुणवक्ता अच्छी होती है और बिचोलिये न होने के कारण मिलावट की संभावना ख़त्म हो जाती है
  3. पक्का बिल – डायरेक्ट सेल्लिंग के माध्यम से प्रोडक्ट लेने से हमें पक्का बिल मिलता है , जिस से देश को अधिक से अधिक टैक्स की प्राप्ति होती है और देश समृद्ध बनता है
  4. रोजगार का अवसर – जैसा की आप सभी जानते है आज देश में दुनिया में बेरोजगारी एक सबसे बड़ा मुद्दा है , पर डायरेक्ट सेल्लिंग के माध्यम से हमें स्वरोजगार का अवसर मिलता है और बेरोजगारी दूर करने में आने वाले समय में डायरेक्ट सेल्लिंग की एहम भूमिका होगी , और डायरेक्ट सेल्लिंग बिज़नेस हम सभी को अतरिक्त आय कमाने का समान अवसर प्रदान करता है
  5. व्यवसाय करने का अवसर – वैसे तो बिना पूंजी लगाए कोई व्यापर नहीं होता और उसके बाद भी कोई संभावना या गेरेंटी नहीं की व्यापर चलेगा अथवा नहीं , पर डायरेक्ट सेल्लिंग ऐसा व्यापर है जो बिना पूंजी लगाए या बहुत कम पूंजी  लगाकर इसको किया जा सकता है और जैसा की इसमें पूंजी की कोई आवस्यकता नहीं होती इसलिए जोखिम की संभावना भी नहीं होती
  6. कोई स्टॉक रखने या मेन्टेन करने की आवस्यकता नहीं – डायरेक्ट सेल्लिंग एक प्रकार का मुक्त व्यपार है जो कही भी कभी भी किया जा सकता है इसमें आपको किसी प्रकार का कोई स्टॉक रखने या फिर उसे मेन्टेन करने की कोई आवस्यकता नहीं पड़ती
  7. एक सामान मूल्य -डायरेक्ट सेल्लिंग में बिकने वाले ज्यादातर सभी उत्पाद पुरे भारत में एक सामान मूल्य पर बेचे जाते हैं
  8. ८. खर्च करने से आय – शायद ही आपने ऐसा कभी सुना या देखा हो की खर्च करने से भी आमदनी हो सकती है, पर डायरेक्ट सेल्लिंग के माध्यम से ऐसा संभव हो पाया है, क्योकि डायरेक्ट सेल्लिंग द्वारा बेचे गए सभी उत्पाद आपको एमआरपी  पर नहीं अपितु  छूट पर मिलते है जो सीधे सीधे आपको काउंटर पर उत्पाद लेते समय बचत होती है , इतना ही नहीं हर उत्पाद पर आपको निश्चित कमीशन ( कॅश बैक ) सीधा आपके बैंक अकाउंट में दिया जाता है , ये कमीशन ( कॅश बैक ) आपकी कार्य करने की क्षमता अथवा आपके बनाये गए डायरेक्ट सेलर ( नेटवर्क ) के आधार पर काम या ज्यादा हो सकता है.
  9. रॉयलिटी जैसी इनकम – आप सभी जानते है की रॉयल्टी एक ऐसी इनकम है जो गिने चुने लोगो को ही मिल पाती है – जैसे लेखक , संगीतकार , वैज्ञानिक आदि , रॉयल्टी एक ऐसी इनकम होती है हो इन सभी  ( लेखक , संगीतकार , वैज्ञानिक )को उनके किये गए किसी अभूतपूर्व काम के लिए पीड़ी दर पीड़ी दिया जाने वाली एक इनकम है, आप सोच रहे होंगे तो इसका डायरेक्ट सेल्लिंग से क्या लेना देना , तो मैं आपको बता दूँ की इन सभी के अतरिक्त अगर कोई है जिसमे ये इनकम  पीड़ी दर पीड़ी मिलती रहे तो वो है वो है डायरेक्ट सेल्लिंग व्यवसाय
  10. सेलिब्रिटी बनने का अवसर – डायरेक्ट सेल्लिंग व्यवसाय एक आम आदमी को आम से ख़ास बना देता है , जैसा की आप जानते है डायरेक्ट सेल्लिंग व्यवसाय, ट्रेडिशनल मार्किट ( परम्परागत व्यापर )-  से अलग है डायरेक्ट सेल्लिंग व्यवसाय में आप खुद ही इसके प्रचारक होते हैं , और अपने ज्ञान को बढ़ा कर और उसका प्रचार प्रसार करके आप एक जाने माने लीडर के रूप में अपने आप को स्थापित कर सकते है , जैसा की आप सभी जानते है की ये डिजिटल युग है यहाँ सब कुछ ऑनलाइन है , इसलिए इसका भरपूर फ़ायदा उठाया जा सकता है और अपने ज्ञान को हम देश दुनिया तक यूट्यूब , फेसबुक , ट्विटर इतियादी के माध्यम से कहाँ से कहाँ ले जा सकते हैं

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